हे जगन्नाथ

5:39 PM, Posted by डा. निर्मल साहू, No Comment

मैं भी तेरा दर्शन कर
नाचता गाता
खुशी में रोता
पर वहां पुजारी के वेश में
जो ठग व लुटेरे बैठे थे
उनसे अपनी जेब व जान
बचाने की फिराक में
भूल गया तेरी स्तुति करना
और उस बेहिसाब भीड़ में
ठीक से प्रणाम भी नहीं कर पाया
व धकेल दिया गया
गर्भ-गृह से।

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